कैसे teaching line में सब कंपनियों को पीछे छोड़ा BYJU’S ने कुछ ही सालो में। जाने BYJU’S की पूरी startup जर्नी
इसके अलावा BYJU’s को इस वजह से भी जाना जाता है कि इसके ब्रांड एंबेसडर bollywood के सुपरस्टार शाहरुख खान है। इसके विज्ञापन में आपने शाहरुख़ खान को देखा होगा। हालाँकि साल अक्टूबर 2021 में जब शाहरुख खान के बेटे आर्यन को NCB ने ड्रग मामले में गिरफ्तार किया था तो BYJU’s ने फजीहत से बचने के लिए शाहरुख खान के सारे विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद बायजू ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। बायजू के माता-पिता भी शिक्षक थे तो बायजू के लिए यह मुश्किल नहीं था। बायजू का पढ़ाया हुआ बच्चों को अच्छे से समझ आ रहा था। यही कारण है कि शुरुआत में सिर्फ 2 students उनके पास पढ़ने के लिए आते थे, लेकिन बाद में 1000 से ज्यादा students उनके पास पढ़ने के लिए आने लगे। साल 2007 तक तो बायजू के पास देश के 9 शहरों में 20 हजार से ज्यादा students थे। इतने students को पढ़ाने के लिए कई बार बायजू को इनडोर स्टेडियम में क्लास लेनी पढ़ती थी।
BYJU’s के लांच होने के बाद पहले तीन महीने में ही करीब 20 लाख students इससे जुड़ गए। साल 2016 में BYJU’s को 921 करोड़ रूपए की फंडिंग मिली। साल 2017 में BYJU’s ने शाहरुख़ खान को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। साल 2018 तक BYJU’s की वैल्युएशन 1 अरब डॉलर को पार कर गई। साल 2019 में BYJU’s भारतीय क्रिकेट टीम का ऑफिशियल स्पॉन्सर बन गया। साल 2021 में BYJU’s ने paytm को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे ज्यादा वैल्यू वाला startup app बन गया।
मार्किट में बने रहने के लिए BYJU’s ने अपने से बड़े कॉम्पटीटर्स को या तो खत्म कर दिया या फिर उनका takeover कर लिया। BYJU’s ने एपिक गेम्स, टॉपर, ग्रेट लर्निंग, हश लर्न, स्कॉलर, व्हूदैट और ग्रेडअप सहित कई कंपनियों का takeover कर लिया।
Biography and Journey of Mukesh Ambani
Biography of Mukesh Ambani, Managing Director of Reliance Industries Ltd.
About Mukesh Dhirubhai Ambani:-
Mukesh Dhirubhai Ambani एक Indian entrepreneur, सबसे बड़े shareholder, अरबपति बिजनेस मैग्नेट, Reliance Industries Ltd. के chairperson and managing हैं। वह 2020 तक एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति थे।
उनका जन्म 19 अप्रैल 1957 को यमन में हुआ था। उनके पिता का नाम Dhirubhai Ambani और माता का नाम Kokilaben Ambani है।उनका एक भाई Anil Ambani और दो बहनें Nina Kothari and Dipti Salgaocar हैं। वे केवल कुछ समय के लिए यमन में रहे क्योंकि Dhirubhai ने 1958 में भारत वापस जाने का फैसला किया।वह मसालों और वस्त्रों का business शुरू करना चाहते थे। 1970 तक, वे भुलेश्वर, मुंबई में दो बेडरूम के apartment में रहते थे। बाद में उनके पिता Dhirubhai ने कोलाबा में ‘सी विंड’ नाम से एक 14 मंजिला अपार्टमेंट ब्लॉक खरीदा।

Education History:-
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के पद्दार रोड के Hill Grange Highschool से पूरी की। उन्होंने Institute of Chemical Technology से Chemical Engineering की थी। उस्के बाद उन्होंने Stanford University में MBA के लिए admission लिया लेकिन 1980 में अपने पिता को Reliance बनाने में मदद करने के लिए उन्होंने admission वापस ले लिया। उनके पिता Dhirubhai का मानना था कि वास्तविक जीवन कौशल का उपयोग अनुभव के माध्यम से ज्यादा होता है, शिक्षा के मुकाबले।
Entrepreneurial Journey:-
उन्होंने 1981 में family business चलाने में Dhirubhai की मदद करना शुरू किया। उस समय तक business को retail and communication industries तक शामिल किया गया था।
Reliance Jio ने 2016 से देश की telecommunication services में शीर्ष पांच स्थान अर्जित किया है।2016 तक, वह 38 वें स्थान पर थे, और पिछले दस सालो से लगातार Forbes magazine’s की list में india के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब अपने नाम किया। वह Forbes की दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों की सूची में एकमात्र businessperson हैं। जनवरी 2018 में, उन्हें Forbes magazine’s द्वारा दुनिया के 18 वें सबसे wealthiest person का स्थान दिया गया था।
वह North America और Europe के बाहर दुनिया के सबसे wealthiest person भी हैं। 2015 में China’s के Hurun Research Institute के अनुसार, वह India के philanthropists लोगों में पांचवें स्थान पर थे।वह बैंक ऑफ अमेरिका के निदेशक बनने वाले पहले गैर-अमेरिकी बने। रिलायंस के माध्यम से, वह Indian Premier League franchise Mumbai Indians के मालिक थे।

About Personal Life:-
1985 में उन्होंने Nita Ambani से शादी की। Dhirubhai के एक dance performance में भाग लेने के बाद उनकी मुलाकात हुई, जिसमें Nita भाग लेती हैं और फिर उन्होंने दोनों का विवाह कराने के बारे में सोचा।
Nita Ambani और Mukesh Ambani के दो बेटे अनंत और आकाश और एक बेटी ईशा है। वे 27 मंजिला Antilia में रहते हैं।
घर की maintenance के लिए 600 staff members रखे हुए है। Antilia इसमें तीन staff members, 160 कारों के लिए एक car parking , एकprivate movie theatre, एक fitness center और एकswimming pool शामिल हैं।
उन्होंने 2007 में अपनी wife के 44वें birthday पर 60 मिलियन Airbus ए319 gift में दिया। Airbus में 180 passengers, satellite television, Wi-Fi, sky bar, Jacuzzi और office स्पेस है। इसमें एक living room और bedroom भी शामिल करने के लिए कस्टम फिट किया गया है। इसमें उनका फेवरेट Mysore Café at Kings Circle Mumbai भी है।
Journey of Ambani’s from ₹15000 to becoming a billionaire:-
1980 में, भारत सरकार ने PFY निर्माण को private sector के लिए खोल दिया। Dhirubhai ने PFY manufacturing plant स्थापित करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। टाटा, बिड़ला और 43 अन्य लोगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद Dhirubhai ने लाइसेंस प्रदान किया, जिसे आमतौर पर लाइसेंस राज के रूप में जाना जाता है।
Mukesh Ambani ने उनके साथ PFY प्लांट बनाने का काम किया। कंपनी में शामिल होने के बाद, उन्होंने दैनिक रूप से तत्कालीन कार्यकारी निदेशक Rasikbhai Meswani को सूचना दी। Dhirubhai ने Mukesh को एक business partner के रूप में माना और उन्हें थोड़े अनुभव के साथ योगदान करने की अनुमति दी।
यह 1985 में Rasikbhai की death के बाद शुरू हुआ और Dhirubhai को भी 1986 में एक स्ट्रोक का सामना करना पड़ा।उस समय सारी जिम्मेदारी Mukesh और Anil ambani पर आ गई। Mukesh ambani ने Reliance Communications Limited की स्थापना की, उन्हें Patalganga plant का प्रभार दिया गया था। उस समय कंपनी तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स में भारी निवेश कर रही थी।
जुलाई 2002 में, दूसरे स्ट्रोक के बाद Dhirubhai की मृत्यु हो गई। उसने Anil और Mukesh के बीच तनाव बढ़ा दिया, क्योंकि Dhirubhai ने वितरण के लिए इच्छा नहीं छोड़ी थी। इसे रोकने के लिए मां Kokilaben ने बीच-बचाव किया। उन्होंने कंपनी को दो हिस्सों में बांट दिया। Mukesh Ambani को Reliance Industries Limited और Indian Petrochemical Corporation Limited दे दी गयी। ऐसी ही Informative information के लिए व्यापर की बात को सभी social media पर follow करे।

In Shark Tank India, Aman and Namit invest Rs 50 lakh in Smart Helmet Company
कैसे ALTOR कंपनी ने हेलमेट बेंचकर बनाया करोड़ो का बिजनेस ? Shark Tank India में अमन और नामित ने किये company में 50 लाख रुपये इन्वेस्ट।
हम बात करेंगे भारत के एक ऐसे startup के बारे में जो स्मार्ट हेलमेट बनाते है और साथ ही हम जानेंगे कि कैसे हेलमेट बनाकर इन्होंने करोड़ों का business खड़ा किया और साथ ही हम जानेंगे कि जब ये Shark Tank में अपना business idea लेकर आए तो किस insvestor ने कितने रुपये इनके business में इन्वेस्ट करे।
चार दोस्तों ने मिलकर एक company स्टार्ट की जिसका नाम Altor है और इस कंपनी को 4 दोस्तों ने मिलकर बनाया।8जिनका नाम शामिक, बिलाल, अनिर्बन और सायन है। ये कंपनी इन्होंने इसलिए बनाई क्योकि भारत मे लगभग 25 करोड़ bikers है और हर घंटे 6 से भी ज्यादा bikers की मौत होती है। बाइक एक्सीडेंट की बजह से, ऐसा ही हुआ इन चारों के दोस्त के साथ, इनका जो एक और दोस्त था उसकी मौत भी एक बाइक एक्सीडेंट की बजह से हुई थी और वो एक घंटे तक सड़क पर ही पड़ा था उसे कोई भी हॉस्पिटल तक लेकर नहीं गए और जब उसे हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉ. ने बोला कि अगर आप इसे 1 घंटे पहले लेकर आते तो हम इसकी जान बचा सकते थे। इसी समस्या का हल करने के लिए इन चारों दोस्तों ने Altor company का निर्माण किया। ताकि जो इनके दोस्त के साथ हुआ है वो और किसी के साथ न हो।
Altor Company क्या है और इनका हेलमेट कैसे काम करता है
Altor Company एक ऐसी कंपनी है जो स्मार्ट हेलमेट बनाते है एक ऐसा हेलमेट जो कि आपको एक्सीडेंट से बचाएगा। अगर कोई भी बाइकर Altor Company का हेलमेट पहनकर एक्सीडेंट का शिकार होता है तो इनका स्मार्ट हेलमेट एक्सीडेंट को तुरंत डिटेक्ट करता है और एक्सीडेंट होते ही Altor का हेलमेट emergency call लगा देता है जिससे उसकी हेल्प के लिए जल्द से जल्द कोई भी पहुँच सकता है। इनके हेलमेट की खास बातें ये है कि जब किसी बाइकर के पास कॉल आती है तो उसे अपनी पॉकेट से मोबाइल निकलने की जरूर नहीं पड़ती वो हेलमेट के द्वारा ही कॉल उठा और काट सकता है। एक्सीडेंट होने पर ये ऑटोमेटिकली emergency call कर देता है और लास्ट लोकेशन भी शेयर कर देता है।
Company की सेल की बात करें तो इन्होंने 5 महीने में 100 हेलमेट बेच दिए है, और इनके एक हेलमेट की की कीमत 5000₹ है और इसको बनाने की जो कीमत लगती हो वो 4000₹ है। मतलब इनको एक हेलमेट पर 1000₹ का profit होता है। Altor Company के फाउंडर्स ने investor से 50 लाख रुपये के बदले अपनी कंपनी के 5% शेयर देने की मांग करी।
Shark Tank के कोन से investor ने altor company को कितने रुपये का क्या offer दिया ?
दोस्तों Shark Tank के investor को इनका idea काफी ज्यादा पसंद आया और सबसे पहला ऑफर farma company की फाउंडर नामिता ने दिया जो कि 50 लाख रुपए के बदले altor company के 20% शेयर लेने का था और दूसरा ऑफर boat company के फाउंडर अमन ने दिया जो कि 50 लाख रुपये में altor company के 10% शेयर लेने का था और तीसरा ऑफर bharatpay के फाउंडर अशनिर और lenskart के फाउंडर पीयूष और shadi.com के फाउंडर अनुपम ने दिया जो कि 50 लाख रुपये में altor company के 10% शेयर लेने का था । तो फिर farma company की फाउंडर नामिता और boat company के फाउंडर अमन दोनों मिल गए और इन्होंने ने भी same ऑफर दिया जो कि 50 लाख रुपये में altor company के 10% शेयर लेने का था ।
फिर altor company के फाउंडर्स ने अमन और नामिता को बोला कि हम आपको 50 लाख के बदले 10% तो नहीं 7% देंगे। तो फिर काफी सोचने के बाद अमन और नामित ने ये इस deal को 50 लाख रुपये with 7% इक्विटी के साथ deal को closed कर दिया। ऐसी ही Informative information के लिए व्यापर की बात को सभी social media पर follow करे।
कैसे Microsoft company को छोड़कर बनाई Ola Cabs
कैसे Microsoft की नौकरी छोड़कर भावेश अग्रवाल जी ने OLA Cabs का business स्टार्ट किया।
आज हम भावेश अग्रवाल जी के बारे में बात करेंगे, जो कि OLA Cabs के Founder है। आज के समय में OLA Cabs को तो हर कोई जानता ही है,और आप शायद OLA Cabs का इस्तेमाल भी करते होंगे, क्योंकि OLA Cabs ने हमारी Journey को आसान बना दिया है। ओला cabs की मदद से हम आसानी से जहां चाहे वहां घुम सकते है, बिना कोई समय बर्बाद हुए। आपको बता दे भावेश अग्रवाल जी ने Microsoft की नौकरी छोड़कर OLA Cabs का business स्टार्ट किया। भाविश अग्रवाल जी की अलग सोच ने ना सिर्फ उन्हें करोड़पति बनाया बल्कि लाखों लोगों के लिए Travel की एक बड़ी problem को भी दूर किया है।
भावेश अग्रवाल Indian Institute of Technology Bombay से Passout है। भाविश Microsoft Company में काम करते थे। लेकिन वो कौन-सा बड़ा कारण था की जिसके चलते उन्होंने Microsoft company को अलविदा कहा और खुद की एक करोड़ों की कम्पनी खड़ी कर दी।
भाविश अग्रवाल जी का जन्म 25 अगस्त 1985 को पंजाब के लुधियाना शहर में हुआ था। श्री नरेश कुमार अग्रवाल उनके पिता और श्रीमती उषा अग्रवाल उनकी माता है। भाविश ने मुबई के Indian Institute of Technology से कंप्यूटर साइंस में Btech इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और Microsoft company में रिसर्च करते हुए जॉब करने लगे। रिसर्च के दौरान ही उन्हें इसके लिए दो पेटेंट भी प्राप्त हो चुके थे लेकिन वे अपनी इस 9 से 5 की सुरक्षित नौकरी से जरा भी खुश नही थे क्योंकि उनके अंदर खुद के लिए काम करने का जूनून पैदा हो गया था। वे एक Entrepreneur बनना चाहते थे लेकिन एक सुरक्षित जॉब ने उन्हें रोका हुआ था और साथ ही वे सोसायटी में हो रही छोटी-मोटी problems को लेकर ऑप्शन देख रहे थे कि भविष्य में समाज की समस्याओं को लेकर कुछ करना चाहिए।
कैसे आया अपनी खुद की कम्पनी शुरू करने का ख़याल
इस बारे में भाविश खुद बताते हैं कि उनकी कम्पनी ola की शुरुआत का आईडिया उनकी खुद की एक car बुकिंग से शुरू हुई थी। जिसका अनुभव बहुत ही बुरा था। एक बार उन्होंने बेंगलुरु से बांदीपुर की यात्रा के लिए एक कार बुक की थी, जिनकी सर्विस बहुत ही ज्यादा खराब थी। जब वे बेंगलुरु से बांदीपुर की यात्रा पर निकले तो आधे रास्ते में ही ड्राईवर ने उनसे पैसे मांगने शुरू कर दिए, और ड्राईवर का बर्ताव, उसके बात करने का तरीका भी सही नहीं था। उसके बुरे व्यवहार से परेशान होकर रास्ते में ही उन्हें गाड़ी से उतरना पड़ा और बाकी की यात्रा बस से करनी पड़ी।
जब वे बस में थे और आगे का सफ़र तय कर रहे थे तब बार-बार उनके दिमाग में यही बात चल रही थी कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। साथ ही साथ उन्हें यह सोच भी खाए जा रही थी कि ऐसे बहुत से लोग भी होंगे जिन्हें अच्छी कार सर्विस नहीं मिल रही होगी और उनके साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा होगा। तभी उन्हें लगा कि उनके जैसे ही बाकी कस्टमर्स एक अच्छी cab सर्विस की तलाश कर रहे होंगे जो उन्हें क्वालिटी सर्विस प्रदान कर सके क्योंकि ज्यादातर यात्रियों का अनुभव बहुत ख़राब ही रहता है इसी सोच को लेकर कि वे इस फील्ड में कुछ बड़ा करेंगे उन्होंगे ola cab company शुरू करने का सोचा।
भाविश, सफ़र के दौरान समझ चुके थे कि कम पैसे में एक अच्छी सर्विस देने से ही ola company को बड़े लेवल पर रन किया जा सकता है इसलिए उन्होंने कुछ ऐसा सोचा जो कस्टमर्स को इससे अच्छा और कोई न दे सके। इसी सोच की वजह से आज ola company 70 से भी ज्यादा शहरों में है और 1.50 लाख लोग प्रतिदिन उनकी इस सर्विस का लाभ ले रहे हैं। Bhavish Aggarwal और उनकी पत्नी Rajalakshmi Aggarwal ने एक फैसला लिया है कि वे कभी भी खुद की कार नहीं खरीदेंगे और वे हमेशा OLA Service का ही इस्तेमाल करेंगे।
Technology और Internet ने business को बढ़ाने में की पूरी मदद
भाविश पहले से ही आईटी फील्ड से थे इसलिए उन्होंने अपना business model इस तरह से तैयार किया था कि कस्टमर को कार बुक करने के लिए या पेमेंट के लिए उनके ऑफिस न आना पड़े।
Cab सर्विस और तकनीकी का combination बहुत ही बढ़िया रहा, क्योंकि इसके App को इस तरह से बनाया गया था जिससे कस्टमर को अपने सुविधा की सारी जानकारी मिल सके। वे online ही बुकिंग कर सकें, रेटिंग और रिव्यू देख सकें और अपने फोन से ही क्वालिटी की पूरी चेकिंग कर सके। भाविश जैसे ही हटकर सोचने वाले उनके दोस्त अंकित भाटी नवम्बर 2010 में कम्पनी में शामिल हुए.. उन्होंने भी उसी कॉलेज से आइआइटी और Mtech की डिग्री प्राप्त की थी। दोनों ने कम्पनी को साथ रन करने का सोचा और आगे बढ़ते गये।
Bhavish Aggarwal ke Parents का क्या रिएक्शन रहा
किसी भी बड़े company का Startup छोटे से ही शुरू होता है। जब company शुरुआत करने की भाविश ने सोची तो दोस्तो और लोगों का मजाक उड़ाना स्वाभाविक था। लेकिन जब आपके काम को parents भी न समझें तो दिक्कत महसूस होती है। शुरुआत में माँ-पापा को लग रहा था कि इतना पढ़ने और नौकरी छोड़ने के बाद कोई travell agent बनने का सोच रहा है लेकिन उनको उस वक्त समझा पाना मुश्किल होता था। क्योंकि कुछ हटकर करने से सभी लोगों की तरह घरवाले भी आपको पागल समझ सकते हैं और इसमें उनकी कोई गलती भी नहीं है लेकिन जैसे-जैसे पैसे आने लगे तो उनको भाविश के स्टार्टअप पर विश्वास होने लगाऔर वे समझने लगे कि लड़का आगे जरूर कुछ बड़ा करेगा।
100 से भी ज्यादा शहर 100 करोड़ से ज्यादा की Income
आज भारत के सबसे बड़ी company OLA देश में बहुत ही तेजी से ग्रो कर रही। आज के समय में ola Cab एवं auto बुकिंग सर्विस देने वाली कम्पनी बन चुकी है। OLA एक स्मार्टफोन ऐप है। cab बुकिंग के लिए सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला ऐप है। Business के स्तर को जब आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि ola ने तीन साल में ही एक अरब भारतीय रूपये का आंकड़ा पार किया है और आज की तारीख में यदि हम देखें तो इस कम्पनी ने 100 भी ज्यादा शहरों में अपना परचम लहराया रही है। ऐसी ही Informative information के लिए व्यापर की बात को सभी social media पर follow करे।

Make in India more crucial from Figure of national security
आज दुनिया India को मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस के तौर में देख रही है: पीएम मोदी
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि Make in India समय की जरूरत थी, और भारत इंक से देश में निर्मित होने वाले सामानों के आयात को कम करने के प्रयास करने का आह्वान किया।
मोदी ने Make in India पर बजट के बाद वेबिनार में बोलते हुए कहा, “अगर हम राष्ट्रीय सुरक्षा के चश्मे से देखते हैं तो आत्मानबीरता (आत्मनिर्भरता) अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि निर्माताओं को Semiconductor इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को दूर करने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इसी तरह, इस्पात और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी विनिर्माण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मोदी ने कहा, आज दुनिया भारत को एक विनिर्माण शक्ति के रूप में देख रही है।
अगर किसी देश से कच्चा माल जाता है और वह उनसे निर्मित माल का आयात करता है, तो यह स्थिति घाटे का सौदा होगी हमें भारत में एक मजबूत विनिर्माण(manufacturing) आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। आज देश में जिस चीज की जरूरत है, उसमें हमें Make in India को बढ़ावा देना है।
मोदी का बयान रूस-यूक्रेन
युद्ध की पृष्ठभूमि में आया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को झकझोर कर रख दिया है। हाल के दिनों में, एक उग्र कोविड -19 महामारी ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया था, जिससे राष्ट्रों के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना अनिवार्य हो गया था। Also read :-
प्रधान मंत्री ने स्थानीय उत्पादों के लिए नए गंतव्य खोजने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, और निजी क्षेत्र से अनुसंधान और विकास पर खर्च बढ़ाने और अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता(diversion) लाने और अपग्रेड करने का आग्रह किया। उन्होंने खनन, कोयला और रक्षा जैसे क्षेत्रों के खुलने के साथ नई संभावनाओं की ओर भी इशारा किया। आपको Global मानकों को बनाए रखना होगा और आपको विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा भी करनी होगी,” उन्होंने कहा। मोदी ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के क्रियान्वयन(implementation) में तेजी लाने के लिए उद्योग जगत से सुझाव भी मांगे।
एक के बाद एक लगातार हो रहे सुधारों का असर दिखाई दे रहा है। उदाहरण के लिए, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए पीएलआई में, हमने दिसंबर 2021 तक 1 ट्रिलियन रुपये का उत्पादन पार कर लिया। हमारी कई पीएलआई योजनाएं वर्तमान में कार्यान्वयन के एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण में हैं, ”उन्होंने कहा।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, जिन्होंने वेबिनार को भी संबोधित किया, ने कहा कि दुनिया आज आत्मनिर्भरता के संबंध में भारत की कहानी का अनुकरण(simulation) करना चाहती है क्योंकि अन्य देश भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे कार्यक्रमों के बारे में बात कर रहे हैं। गोयल ने विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपनी पांच सूत्रीय दृष्टि भी साझा की, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान को अब 14 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक ले जाना, वैश्विक व्यापार को अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत तक बढ़ाना, शीर्ष बनना शामिल है। सेवाओं के निर्यात में तीन राष्ट्र, विदेशी व्यापार में सहायता के लिए छोटे व्यवसायों का समर्थन करते हैं, और 10 नवाचार केंद्र बनाते हैं।
Today Cryptocurrency declined as the Russia Ukraine war
Global Cryptocurrency बाजार पूंजीकरण पिछले 24 घंटों में 5.21 % गिरकर 1.83 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जबकि इस अवधि के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम 10.69% घटकर 85.22 बिलियन डॉलर हो गया।
पिछले 24 घंटों में, विकेंद्रीकृत(dec
entralized) वित्त (DEFi) क्षेत्र में कुल मात्रा 14.55 बिलियन डॉलर रही, जो 24 घंटे के Cryptocurrency ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 17.08% है। स्थिर स्टॉक की कुल मात्रा 71.87 बिलियन डॉलर थी, जो 24 घंटे के Cryptocurrency ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 84.33% था।
Global Cryptocurrency बाजार फिर से गिर गए क्योंकि रूस ने यूक्रेन पर अपना हमला तेज कर दिया, दक्षिणी यूक्रेनी शहर खेरसॉन पर कब्जा कर लिया और कीव और खार्किव पर आक्रामक हो गया।
4 मार्च की सुबह Bitcoin का बाजार प्रभुत्व 0.11% गिरकर 43.06% हो गया और मुद्रा 41,430.77 डॉलर पर कारोबार कर रही थी।
रुपये के संदर्भ में, Bitcoin 5.19 % गिरकर 32,65,396 रुपये पर कारोबार कर रहा था जबकि Ethereum 7.04 % गिरकर 2,15,643.5 रुपये पर बंद हुआ।
कार्डानो 5.3% गिरकर 69.84 रुपये और हिमस्खलन(Avalanche) 6.6 प्रतिशत गिरकर 6,113.1 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 24 घंटों में पोलकाडॉट 5.4 फीसदी गिरकर 1,373.99 रुपये और लिटकोइन 2.25 फीसदी गिरकर 8,489.89 रुपये पर बंद हुआ था। टीथर 0.39 प्रतिशत बढ़कर 78.92 रुपये पर था। मेमेकॉइन SHIB 5.21 प्रतिशत गिर गया जबकि डॉगकोइन 4.65 प्रतिशत गिरकर 9.93 रुपये पर कारोबार कर रहा था। टेरा (LUNA) 1.98 प्रतिशत गिरकर 7,133.99 रुपये परhai.
अन्य समाचारों में, ब्लॉकचैन एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म एलिप्टिक द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेनी क्रिप्टो क्राउडफंडिंग प्रयासों ने अब $ 50.9 मिलियन की कमाई की है। एलिप्टिक ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है, “यूक्रेनी सरकार और सेना को सहायता प्रदान करने वाले एक गैर सरकारी संगठन ने रूसी आक्रमण की शुरुआत के बाद से 89,000 से अधिक क्रिप्टो संपत्ति दान के माध्यम से $ 50.9 मिलियन जुटाए हैं।” यूक्रेन का क्रिप्टो क्राउडफंडिंग पुश 26 फरवरी को शुरू हुआ, जब यूक्रेनी सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने घोषणा की कि वह अब क्रिप्टोक्यूरेंसी दान स्वीकार कर रहा है।
जब यूक्रेनी सरकार ने पहली बार घोषणा की कि वह क्रिप्टोक्यूरेंसी दान स्वीकार कर रही है, तो उसने इच्छुक दाताओं के लिए एक बिटकॉइन और एथेरियम वॉलेट पता साझा किया। प्रति ब्लॉकचेन रिकॉर्ड, उन दो पतों को अब क्रमशः $ 10 मिलियन और $ 16 मिलियन मूल्य के बिटकॉइन और एथेरियम प्राप्त हुए हैं।
Decentralized स्वायत्त संगठन यूक्रेन डीएओ ने 26 फरवरी को शुरू हुई और 2 मार्च को समाप्त हुई एक नीलामी में 2,258 ईटीएच (लगभग 6.75 मिलियन डॉलर) जुटाए। बाजार में गिरावट के बाद, यह राशि आज लगभग 6.4 मिलियन डॉलर है। पिछले महीने शुरू किया गया, यूक्रेन डीएओ इंग्लैंड में रहने वाले एक यूक्रेनी कार्यकर्ता अलोना शेवचेंको के दिमाग की उपज है।
शेवचेंको का कहना है कि यूक्रेन डीएओ डिजिटल कलाकार सामूहिक प्लेसरडीएओ के सदस्यों और वैचारिक विरोध कला समूह, पुसी रायट के संस्थापक नाद्या तोलोकोनिकोवा के साथ जुड़ने के बाद एक साथ आया था। साथ ही, पूर्व राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि वह कुछ क्रिप्टो एक्सचेंजों में “निराश” हैं जिन्होंने रूसी उपयोगकर्ताओं को अपने प्लेटफॉर्म से प्रतिबंधित नहीं किया है।
मैं यह देखकर निराश था कि कुछ तथाकथित Crypto एक्सचेंज, उनमें से सभी नहीं, लेकिन उनमें से कुछ, रूस के साथ लेनदेन को समाप्त करने से इनकार कर रहे हैं,” क्लिंटन ने एमएसएनबीसी पर द रेचेल मैडो शो पर हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान कहा।
उन्होंने कहा, “हर किसी को अभी रूसी आर्थिक गतिविधि को अलग-थलग करने के लिए जितना संभव हो सके उतना करना चाहिए।” विशेष रूप से, कॉइनबेस, बिनेंस और क्रैकन सहित कई क्रिप्टो एक्सचेंजों ने सभी रूसी उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने के विकल्प को अस्वीकार कर दिया है, यह कहते हुए कि ऐसा करने के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है।
कैसे हुई थी Dominos’s Pizza की शुरुआत, जानें Thomas Stephen Monaghan Startup की पूरी कहानी
Thomas Stephen Monaghan Founder Of Dominos Pizza की सफलता की कहानी
आज हम एक ऐसे व्यक्ति की success story का discussion करेंगे जिसका नाम पुरे वर्ल्ड में फेमस है। आज हम Domino’s Pizza Founder थॉमस स्टीफेन ‘टॉम’ की success story के बारे में बताएंगे। ये एक से व्यक्ति है जिन्होंने जीवन में कई मुश्किलों का सामना करके अपनी मेहनत, इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता से आज Domino’s Pizza को इस बुलंदी तक पहुँचाया है।

Thomas Stephen का जन्म अमरीका के मिशिगन राज्य के एन आर्बर शहर में 25 मार्च 1937 को एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके परिवार में माता-पिता और एक छोटे भाई थे। पिताजी एक मामूली से ट्रक ड्राईवर थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्ही के कंधो पर थी। परिवार का खर्चा जैसे-तैसे चल ही रही थी कि अचानक एक दिन christmas की evening पर उनके पिताजी का देहांत हो गया तब उनकी उम्र मात्र 4 वर्ष की थी।
अब उनकी घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही थी तो ऐसे में उनकी माताजी को घर की आर्थिक स्थिति के कारण Thomas Stephen और उनके भाई को मिशिगन स्थित “सेंट जोसफ होम” में छोड़कर 6 वर्षो के लिए नर्सिंग कोर्स करने चली गई। इन 6 वर्षो में Thomas Stephen Monaghan को sis. मैरी बेरारडा की संगत में आस्था और चर्च के प्रति प्रेम जागृत हो चुका था। इसके 6 वर्षो बाद उनकी माँ दोनों भाइयो को अपने साथ ट्रांसवर्स सिटी ले गई जहाँ वो अब अपना नर्सिंग कोर्स पूरा करके एक अस्पताल में नर्स के रूप में कार्य कर रही थी।
Stephen की अपनी माँ से कभी नही बनी थी और उनके माँ के साथ रिश्ते हमेशा ही खराब रहे। जबकि उन्होंने भी घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सब्जियाँ उगाकर बेचीं, मछली पकड़कर भी बेचीं और मिलिकेन डिपार्टमेंटल स्टोर्स के सामने ट्रांसवर्स सिटी रिकॉर्ड ईगल की book भी बेचने तक का कार्य किया लेकिन अंत में उनकी माँ ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। अनाथालय जाने के बाद उन्होंने वहां से ट्रांसवर्स सिटी के ‘सेंट फ्रांसिस स्कूल’ से अपनी पढ़ाई जारी रखी पर धर्म और चर्च के प्रति अपने लगाव के कारण वो प्रीस्ट बनने की सोचने लगे और अनाथालय के प्रीस्ट के द्वारा उन्हें मिशिगन के ग्रांड रैपिड्स में स्थित ‘सेंट जोसफ सेमिनरी’ में भेज दिया गया लेकिन जल्दी ही वहाँ उन्हें अनुशासनहीनता का दोषी मानकर निकाल दिया गया और उनका प्रीस्ट बनने का सपना भी अधूरा रहे गया।
उसके बाद वो फिर माँ के साथ रहने लगे लेकिन जल्दी ही आपसी तनाव की वजह से माँ ने उन्हें juvenile detention house में डाल दिया। वहाँ से एक पति-पत्नी ने उन्हें बाहर निकाला और एन आर्बर के सेंट थॉमस स्कूल में admission करवा दिया। यहाँ से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करके मिशगन के बिग रैपिड्स के ‘फेरिस स्टेट कॉलेज’ के आर्किटेक्चर ट्रेड स्कूल में दाखिला ले लिया।
इसके बाद उन्होंने 3 वर्ष तक navy में नौकरी की और अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरे 2000 डॉलर बचाये लेकिन एक ऑइल कंपनी के ‘जल्दी अमीर बनिए’ स्कीम के झांसे में आकर अपनी पूरी जमा पूँजी गंवा दी। फिर जैसे तैसे अपनी पढाई पूरी करने के लिए यूनिवर्सिटी में admission ले लिया।
Thomas Stephen Monaghan ने वर्ष 1960 में अपने छोटे भाई के साथ मिलकर मिशिगन के यपसिलान्ती शहर के डोमोनिक डीवात्री नामक व्यक्ति से pizza store खरीदकर pizza business शुरू किया। शुरू में पिज़्ज़ा डिलीवरी के लिए फैक्ट्री के ही 2 बेरोजगार कर्मचारियों को रख लिया। सबकुछ शरू किया ही था कि 8 महीने बाद ही छोटा भाई उनका साथ छोड़ कर चला गया।
उसके बाद Thomas Stephen Monaghan अकेले ही कुछ समय तक business चलाते रहे। फिर जल्द ही उन्हें नये पार्टनर जिम गिल्मौर मिले और जल्दी ही उनकी मेहनत रंग लाई और बस 1 साल के अंदर ही उन्होंने यपसिलान्ती में अपना दूसरा pizza स्टोर खोल लिया और फिर 2 साल के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में तीसरा ‘Pizza King’ खोल लिया।
Thomas Stephen Monaghan ने अपने नये पार्टनर को pizza store दे दिया और खुद से नए business Dominos के नाम से कंपनी शुरू की। उनका लक्ष्य शुरू से ही लोगो को सबसे स्वादिष्ट और अच्छी क्वालिटी का pizza देना था। उन्होंने उसी तरफ अपना सारा ध्यान लगा रखा था।
फिर उन्होंने america के लोगो के बदलते कल्चर और ट्रेंड को देखते हुए Pizza Home Delievery Service शुरू की जिसके लिए उन्होंने एक ऐसे इंसुलेटेड pizza box का निर्माण करवाया जिसमें pizza लंबे समय तक गर्म रहता है। आख़िरकार उनका Dominos Pizza खूब चलने लगा और 1969 तक Dominos Pizza के 12 store खुल चुके थे लेकिन तभी उनके जीवन में एक भारी मुसीबत आई और उनके main pizza store में आग लग गई जिसके बाद business में उन्हें काफी नुक्सान हुआ और करोड़ो रुपये का कर्ज ना चुकाने के कारण कोर्ट ने उन्हें दिवालिया घोषित कर दिया और बैंक ने Dominos Pizza को अपने आधीन ले लिया।
इधर बैंक Dominos Pizza को बेचने के चक्कर में था पर कोई उसे नही ले रहा था और ना ही बैंक उसे ढंग से चला पा रहा था | ऐसे में बैंक ने Thomas Stephen Monaghan को 200 डॉलर प्रति हफ्ता के वेतन पर नौकरी पर रख लिया | उसके बाद वो रात-दिन मेहनत कंपनी को प्राप्त करने के लिए करने लगे। आख़िरकार वर्ष 1971 में बैंक ने Dominos Pizza को डूबता मानकर Thomas Stephen Monaghan को एक स्टोर के बदले domino’s के सारे शेयर वापस कर दिए | अब भागदौड़ पूर्ण तरह अपने हाथ में आने के बाद उन्होंने सबसे पहले कंपनी को अपने पैरो पर खड़ा करने के लिए Dominos Pizza के 5 स्टोर अपने प्रतिद्वंदी ड्रेटाईट के Dino’s को बेचे जिसके कारण Dino’s सबसे बड़ा पिज़्ज़ा चैन बन गया।
अब उन्होंने बाकी बचे 5 स्टोर के साथ ही काम आगे बढ़ाना शुरू किया। धीरे-धीरे पहले बैंक का कर्ज उतारा और फिर पिछली वाली गलतियों से सबक लेकर धीरे-धीरे कई जगह कंपनी स्टोर को खोलकर Dominos Pizza का विस्तार किया।
इसके बाद उन्होंने 1973 में कंपनी को और आगे बढ़ाने के लिए 30 मिनट में गारंटीड pizza की तरकीब अपनाई जिसमे Pizza Home Delievery Service में ग्राहक को 30 मिनट में pizza delivery न हो पाने की स्थिति में एक पिज़्ज़ा फ्री में दिया जाएगा और 30 मिनट के अंदर ही pizza ग्राहक तक पहुंचाने पर डिलीवरी मैन को बोनस प्रदान कर सम्मानित किया जाता था। Thomas Stephen Monaghan ये तरकीब काम कर गई और Dominos Pizza चल निकला और आज की स्थिति में ये Pizza Hut के बाद यह world की सबसे बड़ी pizza chain कंपनी बन गई जो कई दूसरे देशो में ग्राहकों को अपनी Pizza Home Delievery Service की सेवा दे रही है।
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Reliance took ctrl of Future Retail stores
अरबपति मुकेश अंबानी की Reliance इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने फ्यूचर रिटेल के कम से कम 200 स्टोरों का संचालन अपने हाथ में ले लिया है और किशोर बियानी के नेतृत्व वाले समूह द्वारा जमींदारों को लीज भुगतान करने में विफल रहने के बाद अपने employees ko नौकरी की पेशकश ki है|
ऑयल-टू-टेलीकॉम समूह की खुदरा शाखा, Reliance रिटेल ने अगस्त 2020 में फ्यूचर ग्रुप के खुदरा और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय को ₹ 24,713 करोड़ में लेने के लिए सहमति व्यक्त की थी, लेकिन फ्यूचर के युद्धरत साथी अमेज़न के रूप में सौदा बंद नहीं किया जा सका। कुछ अनुबंधों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अदालतों में। भविष्य किसी भी गलत काम से इनकार करता है।
सूत्रों ने कहा कि कई जमींदारों ने Reliance से संपर्क किया था क्योंकि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL), जो घाटे में चल रहा था, किराया देने में असमर्थ था। फ्यूचर के 1,700 sai अधिक आउटलेट hai जिनमें बिग बाजार की लोकप्रिय story भी शामिल हैं, और इसने
अपने कुछ आउटलेट्स के लिए लीज भुगतान नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि बंद होने का सामना करते हुए, Reliance ने कुछ स्टोरों के पट्टों को अपनी सौतेली सहायक, आरआरवीएल को हस्तांतरित कर दिया और उन्हें स्टोर संचालित करने के लिए फ्यूचर को सबलेट कर दिया।
Mukesh Ambani nai कहा कि तब से इसने दुकानों की रीब्रांडिंग(rebranding ) शुरू कर दी और वहां कार्यरत सभी कर्मचारियों को अपने पेरोल पर लेने की पेशकश की hai.
इसके अलावा, इन स्टोरों पर अधिकांश इन्वेंट्री की आपूर्ति Reliance jio smart द्वारा की जा रही थी क्योंकि नकदी की तंगी के कारण एफआरएल मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं को बकाया राशि का भुगतान नहीं कर सका। रिलायंस इन स्टोर्स के बिग बाजार साइनेज और ब्रांडिंग को अपने ब्रांड से बदल सकती है। Amazon ने तर्क दिया है कि फ्यूचर ने 2019 के सौदे की शर्तों का उल्लंघन किया है, जब अमेरिकी ई-कॉमर्स दिग्गज ने फ्यूचर ग्रुप यूनिट में 200 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया था। अमेज़ॅन की स्थिति कोध्यस्थ द्वारा समर्थित कि सिंगापुर के एक मया गया है।
अपने स्टोर के Take over की confirmation या refutation किए बिना, फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ने ak स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग mai कहा, “शेयर धारकों को पता है कि एफआरएल एक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। कंपनी ने अपनी ऋण सर्विसिंग पर चूक की है और जैसा कि पहले ही सूचित किया गया है, खाता कंपनी के बैंकों द्वारा एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया है।”
FRL nai ने कहा कि working capitals की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है और “बड़ी बकाया राशि के कारण बड़ी संख्या में स्टोर के लिए समाप्ति नोटिस प्राप्त हुए हैं, और अब हमारे पास ऐसे स्टोर परिसर तक पहुंच नहीं होगी।”अमेज़न द्वारा अक्टूबर 2020 में शुरू की गई चल रही मुकदमेबाजी, और जो पिछले 1 and half year से जारी है, ने योजना (रिलायंस अधिग्रहण) के कार्यान्वयन में गंभीर बाधाएं पैदा की हैं, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के कामकाज पर गंभीर प्रतिकूल (adverse) effect पड़ा है।
यह कहते हुए कि फर्म घाटे को कम करने के लिए अपने परिचालन को कम कर रही है। FRL ग्राहकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए अपने ऑनलाइन और होम डिलीवरी व्यवसाय का विस्तार करने का प्रस्ताव कर रहा है। फाइलिंग में कहा गया है, “कंपनी को कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मुश्किल हो रही है। store स्तर pai घाटा बढ़ना एक गंभीर चिंता का विषय है और यह एक दुष्चक्र(vicious circle) है जहां बड़े संचालन से अधिक नुकसान हो रहा है।” Company को पिछली चार तिमाहियों में ₹4,445 cr. का घाटा हुआ है।
एफआरएल ने कहा कि उसे उम्मीद है कि Reliance डील को लागू किया जाएगा क्योंकि यह सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद होगा। संपर्क करने पर, अमेज़ॅन ने विकास पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एफआरएल ने जनवरी में अपने ऋणदाताओं को अमेज़ॅन के साथ अपने विवाद का हवाला देते हुए, लापता बैंक भुगतानों पर दिवाला कार्यवाही का सामना करने से बचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट 28 फरवरी, 2022 को अमेजन और फ्यूचर ग्रुप के विवाद में दलीलें सुनेगा। अगस्त 2020 में, घाटे mai चल रही रिटेल दिग्गज ने अपने रिटेल, Whole-sale और Logitics आर्म्स को बेचने का Offer रखा, जिसमें बिग बाजार में फैशन, कोर्यो, फूडहॉल और ईजीडे सहित रिलायंस को 24,713 करोड़ रुपये में बेचने का प्रस्ताव था। एफआरएल 31 दिसंबर, 2021 को अपने ऋणदाताओं को ₹3,494.56 करोड़ के पुनर्भुगतान की देय तिथि से चूक गया। खुदरा उद्यम ने अमेज़ॅन के साथ चल रहे विवाद पर देरी को दोषी ठहराया। लेकिन उसने अगले 30 दिनों में यानी जनवरी 2022 तक कर्ज चुकाने की मांग की थी – जो वह भी चूक गया।
इसके बाद उसने कर्ज ki पहली किस्त का भुगतान करने के लिए अपने छोटे प्रारूप वाले stores को बेचने की demand की, लेकिन अमेज़ॅन ने उस कदम का भी विरोध किया। उत्तरार्द्ध ने समारा कैपिटल के माध्यम से ₹7,000 करोड़ के ऋण के साथ एफआरएल की मदद करने के लिए स्वेच्छा से मदद की, जिसे एफआरएल के स्वतंत्र निदेशकों ने अस्वीकार कर दिया था। किशोर बियानी की एफआरएल को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बैंकरों और एफआरएल को समाधान निकालने का निर्देश दिया था। दिल्ली High court को भी शीर्ष अदालत ने फ्यूचर ग्रुप के Prospectus से मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया था क्योंकि किसी भी आदेश से फर्म के बहुत से भारतीय कर्मचारियों, बैंकरों और ऋणदाताओं पर असर पड़ेगा।
Gurugram civic body decisions
दिल्ली/NCR
Gurugram नगर निगम (MCG) ने अपने नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) पोर्टल के प्रमुख को चिंटेल पारादीसो और डेवलपर की अन्य परियोजनाओं की संपत्ति आईडी को अपडेट करने से रोकने और बंद करने का निर्देश दिया है। निगम के कराधान विभाग ने एनडीसी जारी करने के प्रभारी अधिकारी को चिंटेल इंडिया के स्वामित्व वाली projects के किसी भी दस्तावेज को पंजीकृत करने से परहेज करने का भी निर्देश दिया है।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव द्वारा अगले नोटिस तक सभी चिंतेल परियोजनाओं के बिक्री विलेखों के पंजीकरण को रोकने के आदेश के लगभग दो सप्ताह बाद यह निर्देश आया है।
Paradiso के अलावा, डेवलपर की अन्य परियोजनाओं में Chintels Serenity, Chintels Corporation Park, Sobha City, International City और ATS Kocoon शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं द्वारका एक्सप्रेस-वे से दूर हैं।
किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री करने के लिए, संपत्ति के मालिक या विक्रेता को एमसीजी के एनडीसी पोर्टल से कोई बकाया नहीं प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। मालिक को एनडीसी प्रदान करने के लिए, संपत्ति आईडी की आवश्यकता होती है। हमने सभी संपत्ति आईडी और उनके अपडेट को निष्क्रिय कर दिया है और बंद कर दिया है ताकि चिंतल्स पारादीसो के डेवलपर के स्वामित्व वाली परियोजनाओं में इकाइयों को बेचा नहीं जा सके, ”दिनेश कुमार, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी ने कहा।
Muncipal corporation of gurugram अधिकारियों ने कहा कि संपत्ति आईडी को तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय कर दिया गया है और निर्णय लिया गया ताकि इन संपत्तियों की रजिस्ट्रियां नहीं की जा सकें।
चिनटेल्स पारादीसो के टॉवर डी में पांच फ्लैटों के रहने वाले कमरे 10 फरवरी को छठी से दूसरी मंजिल तक गिर गए, जिसमें दो निवासियों की मौत हो गई। हादसे के बाद उपायुक्त ने 18 फरवरी को भेजे पत्र में सब-रजिस्ट्रारों को डेवलपर की सभी परियोजनाओं की बिक्री बंद करने का निर्देश दिया। पत्र में यादव ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि डेवलपर की गलती थी।
डेवलपर के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और जांच की जा रही है और एक संरचनात्मक ऑडिट चल रहा है।
निवासी जो अपनी संपत्ति को बाहर निकालना और बेचना चाहते हैं, वे निर्णय से प्रभावित होंगे। लेकिन बहुत uncomfortable भी है क्योंकि अगले वित्तीय वर्ष में बस एक महीना बाकी है और आने वाले वित्तीय वर्ष से संपत्ति कर का भुगतान करना होगा। जिन लोगों ने कर्ज लिया है और अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं, वे भी प्रभावित होंगे, ”सोभा शहर के निवासी डीपी गौर ने कह |
India must aim for semiconductor ,self-sufficiency
प्रधान मंत्री ने घरेलू निर्माताओं से इलेक्ट्रिक वाहन, चिकित्सा उपकरण और स्टील जैसे अन्य प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति करने का आह्वान किया है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के पास Semiconductor जैसी प्रमुख वस्तुओं के मामले में self sufficient होने के अलावा “कोई विकल्प नहीं” है, एक कदम जो मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देगा।
मोदी ने 3 मार्च को ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ पर आयोजित बजट के बाद वेबिनार में कहा, “जब Semiconductor की बात आती है तो भारत के पास ‘आत्मनिर्भर’ होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह क्षेत्र मेक इन India के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है।” उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा।
पिछले साल के अंत में Semiconductor की कमी ने विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र की उत्पादन क्षमताओं को बाधित कर दिया, जिससे india को नुकसान हुआ। यह सुनिश्चित करने के लिए कि समस्या फिर से न हो, सरकार ने दिसंबर में घरेलू Semiconductor और डिस्प्ले बोर्ड उत्पादन के लिए 76,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना की घोषणा की।
3 मार्च को अपने संबोधन में, प्रधान मंत्री ने निर्माताओं से इलेक्ट्रिक वाहन, चिकित्सा उपकरण और स्टील जैसे अन्य प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति करने का भी आह्वान किया। मोदी ने कहा, “हमारा लौह अयस्क विदेश जाता है और हम उन्हीं देशों से गुणवत्ता वाले स्टील का आयात करते हैं। भारतीय निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आयात पर हमारी निर्भरता कम से कम हो।
भारत जितना बड़ा देश कभी भी प्रगति नहीं कर पाएगा और हमारे युवाओं को अवसर नहीं दे पाएगा यदि यह केवल एक बाजार है। हमने महामारी के दौरान देखा है कि कैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला नष्ट हो गई है| आज दुनिया भारत को एक विनिर्माण के रूप में देखती है। बिजलीघर। हमारा विनिर्माण क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 15 प्रतिशत है। लेकिन मेक इन इंडिया के सामने अनंत संभावनाएं हैं। हमें एक मजबूत विनिर्माण आधार बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए|















